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LINGUAMÓN - Casa de les Llengües

भाषाई उत्तरजीविता

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भाषाई उत्तरजीविता

भाषाई उत्तरजीविता

आज पृथ्वी की लगभग 5500 पशु प्रजातियाँ लुप्त होने के ख़तरे में हैं। साथ ही साथ यूनेस्को के अनुसार आज की तारीख़ में बोली जाने वाली लगभग 6000 भाषायों में से आधी से ज़्यादा इस शताब्दी के दौरान लुप्त हो जाएँगी। 

यह ग्रह पारिस्थितिक रूप से आगे चलने में सक्षम तभी रहेगा अगर आर्थिक या औद्यौगिक विकास प्राकृतिक संसाधनों को ख़तरे में न डाले। ठीक इसी तरह से भाषाई रूप से आगे तभी चल पाएगा जब भाषायों की उत्तरजीविता बरकरार रखी जाएगी, उनके बोलने वालों की संख्या या फिर उनकी राजनैतिक व आर्थिक ताकत के बावजूद भी। 

तो फिर मुद्दा भाषायों के साथ-साथ रह पाने का है। व यह कि उनमें से कुछ की ताकत दूसरी भाषायों के लुप्त होने का कारण न बने। उनके साथ-साथ रहने की बात है, बिना प्रधानता   का या फिर अधीनता का नाता बनाए। 

इसीलिए Linguamón – भाषा भवन में हम यह आवश्यक मानते हैं कि पूरे विश्व को एक साथ प्रयास करना चाहिए ताकि समाज विश्व की संस्कृतियों व भाषायों के संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जागरुक हो सके। 

हम कार्यरत हैं ताकि स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय सरकारें तक भाषायों के संरक्षण व प्रसार के प्रति वचनबद्ध हों। व इसलिए कि सारे नागरिक नयी संस्कृतियों की ओर एक खुली सोच रखें, अपनी संस्कृति को बिना भूले। Linguamón – भाषा भवन निश्चित रूप से सारी भाषायों व उनके सारे बोलने वालों की मान्यता व सम्मान के लिए कार्यरत है। 

संसार हमारी पहचान बनाने वाले भाषाई व सांस्कृतिक साधनों का नाश किए बिना विकास तथा   पारस्परिक संप्रेषण कर सकता है। 

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