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LINGUAMÓN - Casa de les Llengües

यूरोप की भाषाएँ

यूरोप की भाषाएँ

विश्व में कितनी भाषाएँ बोली जाती हैं यह कहना कठिन है। यह जानकारी उन्हें हमेशा स्तब्ध करती है जो भाषा-विज्ञान के क्षेत्र से संबंध नहीं रखते हैं, परंतु यह एक सच है। स्वाभाविक तौर पर यूरोप में यही हाल है व इसमें कुछ भी अजीब नहीं है।

यूरोपीय महाद्वीप पर ऐसी भाषाएँ हैं जो लगभग लुप्त ही हो गई थीं पर जो पिछले कुछ समय में लौट आई हैं (जैसे क्रीमिया की तातारी, उन लोगों द्वारा बोली जाने वाली जिन्हें निर्वासन दे दिया गया था), और वे भाषाएँ भी हैं जो उन लोगों के साथ आती हैं जो उन्हें काम में लाते हैं (जैसे अब चीनी)। ऐसी भाषाएँ भी हैं जो समाज की इच्छानुसार पहचान व सामाजिक जुड़ाव का तत्त्व बनती है, पहले से ही विद्यमान भाषायों के बल पर जन्म लेती हैं (जैसे लक्समबर्गी, जो पहले जर्मन की एक स्थानीय प्रकार थी), व ऐसी जो पुर्नस्थापित होना चाहती हैं (जैसे अब कोरनिश)। दुर्भाग्य से ऐसी भी हैं जो लुप्त हो रही हैं (जैसे आरागोनी)। सब कुछ देखकर यह कहना कठिन है कि यूरोप में कितनी भाषाएँ बोली जाती हैं।

फिर भी यह माना जा सकता है कि यूरोपीय महाद्वीप पर बोली जाने वाली भाषाएँ, अटलांटिक महासागर से यूराल की पहाड़ियों के बीच – कॉकस की पहाड़ियों को छोड़कर – , सत्तर की संख्या के आस-पास हैं, गूंगे-बहरे लोगों के समुदायों के विभिन्न चिन्हों की भाषा को व उन भाषायों को नहीं गिनते हुए जो सारे विश्व से आए हुए नए यूरोपीय जन आम भाषा में प्रयुक्त करते हैं।

इन सत्तर में से अधिकतर भाषाएँ भारतीय-यूरोपीय परिवार की हैं, जिसका मतलब है कि इनका स्रोत एक है, व यह कि ये मिलती-जुलती हैं। जबकि ये समान तत्त्व, उदाहरण के लिए इतालवी व स्वीडिश के बीच, अक्सर सिर्फ़ विशेषज्ञ ही देख पाते हैं चूंकि सीधे-सीधे देखने पर ये बहुत उभरे हुए नहीं हैं। यूरोप में यूराल परिवार की भी भाषाएँ हैं (जैसे फिनलैंडी, एस्तोनियाई, सामी या हंगरी) व आलताइक परिवार की भी (तुर्की या तातारी) व यहाँ तक की अफ्रीकी-एशियाई परिवार तक की भी एक भाषा, माल्टी, अरबी के साथ संबंधित, व एक अज्ञात परिवार की भाषा: बास्क भी।

यूरोप में बाल्टिक भाषाएँ (लातवी व लिथुआनी), केल्टिक भाषाएँ (गाएली आयरलैंडी, स्कॉटी व ब्रेतोनी), स्लावी परिवार(रूसी, पोलिश, सोराब व मासेदोनी), जर्मन  परिवार(अंग्रेज़ी, जर्मन, फ्रिसो व आइसलैंडी) व रोमन परिवार(काताला, रोमानी, स्पेन या ऑक्सिता) भारतीय-यूरोपीय भाषाएँ हैं। साथ में यूनानी, अल्बानी व रोमानी भी, जो ऐसी भारतीय-इरानी भाषा है जिसे बहुत से यूरोपीय बंजारे बोलते हैं।

यूरोपीय भाषायों ने सारे इतिहास में एक-दूसरे से शब्द लिए हैं –साफ़ है कि दूसरे महाद्वीपों की भाषायों से भी–, एक बहुत ही जीवंत रिश्ता बनाकर रखते हुए। एक उदाहरण के तौर पर तुर्की ने बहुत सी यूरोपीय भाषायों को हावियार (कावियार) य योगर्ट (दही) जैसे शब्द दिए हैं। साउना शब्द, जो काफी भाषायों में है, फिनलैंडी से आया है। 

यूरोपीय समाजों को आज भाषाई विविधता बनाए रखने की बहुत बड़ी चुनौती है, जिसे बिना किसी ख़ास सांस्कृतिक एकता के उन्होंने आप्रवासियों की भाषायों के साथ-साथ संभाले रखा है, भाषाएँ जो आज के समय में महत्त्वपूर्ण हैं। इसका कहने का मतलब है कि देशों के ऊपर से निकलते हुए संप्रेषण के रास्ते ढूंढने होंगे जिससे किसी एक भाषा का स्वामित्व नहीं रहे व महाद्वीप की उन सारी भाषायों को जीवन-दान देना जो आर्थिक या राजनैतिक कारणों से कमज़ोरी की हालत में हैं जिससे उनकी उत्तरजीविता को ख़तरा है।

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