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कातालुन्या में आप्रवासियों की भाषायें

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कातालुन्या में आप्रवासियों की भाषायें

कातालुन्या में कितनी भाषायें बोली जाती हैं? ये कौन-सी भाषायें हैं?पिछले कुछ सालों से कातालुन्या की आबादीकीजनसांख्यिकीय रचना पर सबसे अधिक गहरा प्रभाव उसके भौगौलिक स्रोत का रहा है। पहले कभीभी यहाँ संसार की भिन्न-भिन्न जगहों से आकर बस जाने वाले व्यक्तियों की संख्या इतनी नहीं थीजितनीअब है, और शायद इसकी भौगोलिक विविधता का सूचक भविष्य में कभी भी इतने उच्च स्तर पर नहीं जा पाएगा। यह इसलिये क्योंकि लोगों के साथ उनकीभाषायें भीआई हैं और अगर ऐसीभाषायें मौजूद हैं जिनके बोलने वालों कीसंख्या कातालुन्या में विकसित होने के लिए काफ़ी हैं तो ऐसीभीहैं जिनके सिर्फ़ एक या फ़िर बहुत कम बोलने वाले हैं और बहुत मुश्किल से हीइनका संप्रेषण अगलीपीढ़ियों तक होगा।

21 वीं सदीके प्रारंभ में कातालानियों कीभाषा-छवि एक विशाल विविधता दर्शाती है -यहाँ संसार कीलगभग तीन सौभाषायें पाई जातीहैं- और यह काफ़ी विश्वस्तता से दो एक के ऊपर एक पड़े चित्रों को भी दिखाती है: लुप्त होने कीप्रक्रिया से जूझतेभाषाई परिवारों (खोइसान, चुक्चि-कामचात्का, ना-देने, एसकिमोआलेउता, ऑस्ट्रेलियाना) का, जिनका कातालुन्या में व्यावहारिक रूप से कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, और मूल स्थानों कीभाषायों का -चाहे उनके बोलने वालों कीसंख्या कुछ भीहो- जो इस तरह से एक ऐसा अमिट निशान छोड़ जातीहैं जो आधिकारिक भाषायों से भी आगे तक जाता है, और जो काफ़ी स्पष्टता से हमें उन क्षेत्रों के बारे में बतलातीहैं जहाँ से कातालुन्या में जन्म न लेने वाले कातालानी आते हैं।

जहाँ तक यूरोप कीभाषायों का सवाल है, पिछले कुछसालों से इतालवी का बिना किसीपूर्व दृष्टांत कीतरह बढ़ना रोमानीऔर मोलदाउ के विकास के समानांतर है। यह वे दो रोमानीभाषायें हैं जिनका विकास बहुत सार्थक तरीके से हुआ है। रूसीके साथ-साथ सारी स्लावीभाषायों ने भी कातालुन्या में अपनी उपस्थिति में बढ़ोतरीकीहै, यहाँ पोलिश, यूक्रेनी, बाइलोरूसी, चेकोस्लोवाकी, स्लोवेकी, स्लोवेनी, मासेदोनियाई, बुल्गारीआदि भाषायें बोलीजातीहैं। भारतीय-यूरोपीय परिवार के भीतर ही अल्बानी, आरमेनी, लेतोनिआई और लिथुआनी भी कातालुन्या के दूर-दूर फैले हुए स्थानों में सुनीजा सकतीहैं, इनके बहुसंख्यक समुदाय न होने के बावजूद भी। यूरालीपरिवार में सामीऔर फिनलैंडी के कुछबोलने वाले हैंपर वे दो समुदाय जो पिछले सालों में सबसे अधिक विकसित हुए हैं वे हैं एस्तोनियाई और हंगरी के। कातालुन्या में कॉकस कीसबसे अधिक बोलीजाने वालीभाषायें जोर्जियाई और चेचे हैं।

पिछले सालों में कातालुन्या में पाकिस्तान, चीन और फिलिपाइन्स ऐसे एशियाई देश हैं जहाँ से अधिक लोग आए हैं। इनमें हम भारत, नेपाल या मंगोलिया को भीगिन सकते हैं। मंगोल जन अभीभीबहुत कम हैं पर कुछ सालों से इनका विकास निरंतर हो रहा है। एशिया कीभाषायों में भारतीय-यूरोपीय परिवार कीभाषायें कातालुन्या में अधिक हैं -और इनमें से कुछके तो बहुत ज़्यादा बोलने वाले हैं-। इस समूह में निम्नलिखित भाषायें पाई जातीहैं: अन्य भाषायों के अलावा पंजाबी, मराठी, हिंदी, बंगाली, उर्दू, गुजराती, नेपाली, कोंकणी, सिंधी। पश्तो, फ़ारसी, सिंहली, कुर्द और इस समूह कीअन्य भाषायों के बोलने वाले भीपाए जाते हैं। भारत के दक्षिणमें द्रविणभाषायें बोली जातीहैं, जिनके कुछ बोलने वाले भीकातालुन्या में हैं, हालांकि भारत से आने वालों में से तमिल, मलयालम, तेलुगु और कन्नड़के समूह बाकीसमूहों कीतुलना में कम आते हैं। आल्ताइक परिवार तीन समूहों में विभाजित किया गया हैऔर कुछलेखकों के अनुसार इसमें कोरियाई और जापानीभाषायें भीहैं।

कातालुन्या में दो आल्ताइक समूहों वालीभाषायें बोलीजातीहैं, तुर्की (तुर्की, उज़बेक, अज़ेरी और कज़ाख) और मंगोल (खालखा कालमुक)। एक और भाषायों व उनके बोलने वालों दोनों कीसंख्या के अच्छे प्रतिनिधित्व वालाएशियाई परिवार है साइनोतिब्बतीपरिवार। चीनीकीसारीविविधतायों, और अन्य भाषायें के अलावा तिब्बतीऔर बर्मीभाषाके बोलने वाले भी कातालुन्या में पाए जाते हैं। और ऑस्ट्री समूह कीभाषायें (विएतनामी, लाओसी, थाईलैंडी, ख्मेर वगैरह) के इतने बोलने वाले तो नहीं हैं पर फ़िर भीमौजूद हैं।

ऑस्ट्रोनेशीपरिवार का विशाल प्रतिनिधित्व -ये पैसिफिक और मैडागास्कर द्वीपों में बोलीजाने वालीभाषायें हैं- फिलिपाइन्स कीभाषायों से होता है: पंगासीनाना, तागाल, इलोकानो, पंपांगान, बिगोल, सेबुआनो, हिलिगायनोन और वाराय-वाराय दूसरीभाषायों के साथ-साथ फिलिपाइन्स कीउन बीस से अधिक भाषायों के समूह का भाग हैं जिन्हें अब तक कातालुन्या में पहचाना गया है। इनमें और भीभाषायें सम्मिलित कीजा सकतीहैं, जैसे मालगाइश, इंडोनेशियाई, रापानुइ, माओरी, जावा, मलय वगैरह, जो प्रतिनिधि समूहों द्वारा न बोलीजाने पर भी हमारी समकालीन भाषाई विरासत का अंग हैं। अमरीकीमहाद्वीप से अपनीसारीविविधतायों समेत स्पेनीऔर पुर्तगाली आई हैं और कुछ मूल-अमरीकी भाषायें भी, जैसे केचुआ -इक्वादोर, पेरू, बोलिविया और अन्य देशों के मूल बोलने वाले के साथ-, आइमारा, माया, गुआरानी, मापुदुंगु, ज़ापोतेका, श्वार और अन्य।

और अफ्रीका से आने वालीभाषायें तीन अलग-अलग परिवारों से संबंधित हैं। प्रथम स्थान पर कानूरि और सोनघाइ नीलसहारीपरिवार कीहैं। दूसरे स्थान पर अफ्रीकी-एशियाईपरिवार कीअरबी सामीपरिवार कीप्रतिनिधि के रूप में है, हिब्रू और अमहारीके साथ-साथ। अमज़िक, जो कातालुन्या में बहुत बोलीजाने वालीभाषायों में से एक है इस परिवार के बेरबेर समूह कीहै। और थोड़े-बहुतबोलने वाले लिए कुशीसमूह कीसोमालीऔर चाड समूह की हाइसा भीहै। ये दोनों अफ्रीकी-एशियाई भाषायें हैं। 

अंत में, नाइजरकोंगोलीपरिवार से ये भाषायें हैं: अटलांटिक समूह कीभाषायें, जैसे फुल, वोलोफ, दिओला और सेरेर; मांदिंग समूह से दिउला, सोनिंनके, बांबरा, क्पेल्ये, वाइ, मांदिंगा, वगैरह; और बेनेउ-कोंगोलीसमूह जो कातालुन्या में विशेष तौर से क्वा समूह कीभाषायों में दिखाई देता है (अकवापेम, त्वि, आकन, फांति, फोन, एवे, योरूबा, गा, इगबो वगैरह) और बांटु भाषायें में भी, जो ऐतिहासिक रूप से बूबि, फांग, एवोंडो और भूमध्यरेखीय गिनिआ कीअन्य भाषायों के बोलने वालों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, और इन भाषायों में अब सुआहिली, लिंगाला, किकोंगो, दुआला और अन्य भाषायों के बोलने वाले भीजुड़गए हैं, चाहे भले हीइनके इतने महत्त्वपूर्ण समुदायनहीं हैं।

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