भाषायों पर की गए विभिन्न शोधकार्य यह दिखाते हैं कि संसार में लगभग 6000 भाषाएँ बोली जाती हैं। फिर भी इन भाषायों का विभिन्न महाद्वीपों में वितरण बहुत अनियमित है।
एशिया व अफ्रीका की भाषाएँ हर महाद्वीप का लगभग 32 प्रतिशत भाग हैं, अमरीकी महाद्वीप की भाषाएँ 15 प्रतिशत व प्रशांत क्षेत्र की भाषाएँ कुछ 18 प्रतिशत। यूरोपीय महाद्वीप विश्व की भाषायों का केवल 3 प्रतिशत हिस्सा ही देता है।
विश्व की आधी भाषाएँ 8 देशों में सीमित हैं: पापुआ नया गिनिया (832), इंडोनेशिया (731), नाइजीरिया (515), भारत (400), मेक्सिको (295), कैमरून (286), ऑस्ट्रेलिया (268) व ब्राज़ील (234)।
इतनी अधिक संख्या में भाषायों की मौजूदगी व उनके संरक्षण की आवश्यकता के बावजूद भी बहुत कम भाषाएँ ही अच्छी स्थिति में हैं। सार्वभौमिकरण के चलते हो सकता है कि कुछ समुदाय अपनी भाषाएँ त्याग दें। पर यह एक सुअवसर भी बन सकता है ग्रह में साथ-साथ रहने वाली भाषायों के आसान प्रसार का।
यूनेस्को के अनुसार संसार की लगभग 6000 भाषायों में से 50 प्रतिशत विलुप्त होने के कगार पर हैं, 96 प्रतिशत भाषाएँ विश्व की केवल 4 प्रतिशत जनसंख्या द्वारा बोली जाती हैं, व इंटरनेट की 90 प्रतिशत विषय-वस्तु मात्र 12 भाषायों तक ही सीमित है।