अफ्रीकी महाद्वीप में कुछ 1500 भाषाएँ बोली जाती हैं जिन्हें चार परिवारों में बाँटा गया है: अफ्रीकी-एशियाई, नाइजिरियाई-कोंगोली, नील-सहारियाई व खोइसान।
अफ्रीकी-एशियाई परिवार महाद्वीप के उत्तर में स्थित है व इसे पांच समूहों में बाँटा गया है:
• सामी
• बेरबेर
• प्राचीन मिस्र
• कुशियाई
• चाद
सामी समूह में बाकि भाषायों के अलावा अरबी व अम्हारी हैं - जो इथियोपिया की आधिकारिक भाषा है। बेरबेर समूह में अमज़िक, तुआरेग व गुआंचे हैं, जो कानारिया द्वीपसमूह में प्राचीन काल में बोली जाती थी। प्राचीन मिस्री अपने समूह की एकमात्र ज्ञात भाषा है। कुशियाई समूह में सोमाली है, जो सोमालिया की आधिकारिक भाषा है, व ओरोमो। अंत में चाद समूह में हाउसा है जो अरबी के बाद अफ्रीका में सबसे ज़्यादा बोली जाती है।
नाइजिरियाई-कोंगोली समूह विश्व में औस्ट्रोनेशी समूह के बाद दूसरा सबसे बड़ा समूह है। ये भाषाएँ सेनेगाल से केन्या होते हुए महाद्वीप के दक्षिण भाग तक विस्तृत हैं। यह निम्नलिखित समूहों में बाँटा जाता है:
• मांदिंग
• कुर्दीफानी
• अटलांटिक-कोंगोली. इस भाषाई समूह में अटलांटिक (भाषाएँ फुल, वोलोफ, सेरेर), क्वा (अकान, एवे, योरुबा) या बेनेउ-कोंगोली जैसे उपसमूह हैं। बांटु भाषाएँ (स्वाहिली, फांग, ज़ुलु, किकोंगो, किंमबुंदु, किकुइउ वगैरह) बेनेउ-कोंगोली उपसमूह की हैं। इनके बीच के संबंध सबसे पहले पहचाने गए।
नील-सहारियाई परिवार अफ्रीकी-एशियाई व नाइजीरियाई-कोंगोली के बीच स्थित विभिन्न जगहों पर स्थापित है। इसमें मासाई, शिलुक, कानुरी, सोंघाई य नुएर जैसी और भी भाषाएँ हैं।
अंत में खोइसान परिवार महाद्वीप के दक्षिण में फैला है व इसमें नामा या क्वादी जैसी भाषाएँ हैं।
इन चार परिवारों में बँटी भाषायों के अलावा अफ्रीकी महाद्वीप पर अंग्रेज़ी, फ्रांसीसी, पुर्तगाली व स्पेनी भी बोली जाती है, उपनिवेशवाद के कारण से। और उपनिवेशों की स्वतंत्रता के साथ बहुत से अफ्रीकी देशों ने किसी यूरोपीय भाषा को आधिकारिक भाषा बनाया: मोज़ांबिक, अंगोला, गिनिया बिसाउ व अटलांटिक के बहुत से द्वीपों में पुर्तगाली, मध्यांतर गिनिया में स्पेनी व फ्रांसीसी व अंग्रेज़ी में से हरेक बहुत से देशों में आधिकारिक भाषाएँ हैं।
अगर हम भाषायों की गतिशीलता देखें तो अफ्रीका अधिकतम भाषाई विविधता का महाद्वीप माना जा सकता है, क्योंकि यहाँ पर विस्थापन प्रक्रिया की सबसे कम प्रतिशत पाई जाती है (संसार के 50 प्रतिशत के मुकाबले लगभग 20 प्रतिशत)। एक और ख़ास बात यह है कि जबकि विश्व के बाकि हिस्सों में लुप्त होती हुई भाषाएँ की जगह यूरोपीय भाषायों द्वारा ली जा रही है अफ्रीका में दूसरी अफ्रीकी भाषाएँ (स्वाहिली, वोलोफ, हाउसा, फुल, चिचोना) ही कमज़ोर भाषायों की जगह ले रही हैं।
दुनिया में सब जगह अफ्रीकी भाषायों से निकले शब्द फैले हुए हैं। चिंपांज़ी या सफारी जैसे शब्द बांटु के हैं। एवे से निकला शब्द कोला बहुत सी भाषायों में कोका-कोला के द्वारा पहुँच गया है व न्यु, खोइसान से निकला हुआ, उन कम शब्दों में से है जो इस परिवार से निकले हैं।
विलुप्त भाषा के अवशेषों की तरह प्राचीन मिस्री ने दूसरी भाषायों में (जैसे काताला) एनदिविया, गोमा, ओआसी या एबेनिस्ता जैसे शब्द छोड़े हैं। इनमें हम वे बहुत से शब्द जोड़ सकते हैं जो अरबी व अमज़िक से निकले हैं व सारी दुनिया में व्याप्त हैं, जैसे की कपास (अरबी)।