एक रेस्त्रां में हम पाएल्या, रोज़बिफ, ताबुले या कुसकुस व एक मार्रोन ग्लासे मांग सकते हैं। पीने के लिए एक पोर्तो वाइन, शैंपेन व अंत में एक कॉनयैक या फिर काइपिरिन्या।
खाने-पीने की भाषा इस तथ्य का एक उदाहरण है कि हमारे समाज लगातार दूसरी संस्कृतियों व भाषायों द्वारा समृद्ध होते आ रहे हैं। व यह कि सारे विश्व में एक जगह की स्थानीय भाषाएँ दूसरी भाषायों के साथ-साथ रहती हैं।
इस विविधता को उचित प्रकार से संभालना चाहिए ताकि जिस सांस्कृतिक समृद्धता को यह दर्शाती है वह बरकरार रहे। इस विविधता का लुप्त होना किन्हीं भाषायों को भी लुप्त कर सकता है व सांस्कृतिक पहचान का क्षय भी। आखिरकार भाषा के पीछे मनुष्य ही होते हैं।
Linguamón – भाषा भवन निष्पक्षता व समानता पर आधारित विश्व का निर्माण करने के लिए बहुभाषावाद की प्रभावी व्यव्स्था का प्रस्ताव रखता है। इस ध्येय के चलते वह बहुभाषावाद की व्यवस्था संभालने के लिए सबसे अधिक सम्मानित व्यवहारों, उत्तम आचरण का प्रसार केंद्र बनना चाहता है।
इसी उद्देश्य को लेकर वह उन अनुभवों को प्रचारित करना चाहता है जो दुनिया भर में सफलता प्राप्त कर चुके हैं, कार्य प्रणाली के प्रतिमान प्रस्तावित करता है व बहुभाषी उत्तम आचरण के अंतरराष्ट्रीय केंद्र द्वारा कातालुन्या का अनुभव दिखाना चाहता है।